WhatsApp च्या पोतडीतून… भाग १

हर चीज का नशा अलग होता है
हर चाँद का दीदार अलग होता है
किसी एक कंपनी में जिंदगी
बरबाद मत करना क्यूं की…
हर कंपनी का पगार
अलग होता है.. 😀

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गिरना भी अच्छा है ,
औकात का पता चलता है
बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को…
अपनों का पता चलता है !

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जिन्हें गुस्सा आता है
वो लोग सच्चे होते हैं |
मैंने झूठों को अक्सर
मुस्कुराते हुए देखा है.. 🙂

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“ना गुजरना ईद के दिन किसी मस्जिद के पास से,
कहीं लोग चाँद समझ कर रोजा ना तोड़ दे,
होकर खफा खुदा तुमसे कहीं…
चाँद जैसे चेहरे बनाना ना छोड़ दे” 🙂

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जाता जाता ती मोठ्या रागाने म्हणाली
“तुझ्यासारखे खुप मिळतील”
मी पण तिला हसत हसत म्हणालो
“पण माझ्यासारखाच का पाहिजे” 😉

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ना वो मिलती है, ना मै रूकता हू, पता नही… रास्ता गलत है या मंजिल..!!

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जिस दिन तुम्हारा सबसे करीबी साथी तुम पर गुस्सा करना छोड दे
तब समझ लेना चाहिए कि तुम उस इंसान को खो चुके हो !

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ये तो अच्छा है मेरे दोस्तों के
हर ख़्वाब पूरे नहीं होते
वरना हम किन-किन को
भाभी जी कहकर बुलाते.. 😀

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खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे।
क्यों की जीसकी जीतनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं….!!
एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी,
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं……

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(संकलन: स्पंदन टीम, साभार – लेखक/कवी)

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